अब मार्किट में मिलेगा काक्रोच का दूध , होता है भरपूर प्रोटीनयुक्त और शुगर फ्री

नई दिल्ली। वैसे तो देसी इलाज में कीड़े मकोड़े विभिन्न रोगो में इस्तेमाल होते रहते है और कीड़े-मकोड़ों को लंबे समय से हाई प्रोटीन, लो-फैट का आहार कहा जाता रहा है. अब तो काक्रोच आधारित प्रोटीन पाउडर और वार्म्स की एनर्जी देने वाले खाद्य वस्तुएं भी तैयार हो रही हैं. हालांकि, कुछ देशों में लोगों को कीड़े मकोड़ों से अब भी परहेज है. लेकिन जो बातें सामने आ रही हैं कि उससे लगता है कि आने वाले समय में ये सुपरफूड का काम करेंगे. कीड़े-मकोड़ों के दूध को दक्षिण अफ्रीका की एक कंपनी ने सुपरफूड के रूप में बेचना और बनाना भी शुरू किया है.

भारत की कंपनी ने की थी शोध

वैसे खोज भारत की ही एक कंपनी की है, जिसने वर्ष 2016 में बताया गया कि हवाई जैसे द्वीपों में मिलने वाले एक खास काक्रोच का अगर दूध बनाया जाए तो ये मनुष्यों के लिए खासी पोषक वैल्यू रखेगा. ये खोज इंस्टीट्यूट फॉर स्टेम सेल बॉयोलॉजी एंड रिजेनरेटिव मेडिसन की है, जो भारत का शोध संस्थान है.

गाय के दूध से ज्यादा स्वास्थ्यप्रद

शोध के प्रमुख डॉक्टर संचारी बनर्जी का कहना है कि इसके जो क्रिस्टल्स होते हैं, वो संपूर्ण भोजन का काम करते हैं-उनमें प्रोटींस, फैट और शुगर होती है. वो एमिनो एसिड से भरपूर होते हैं. अध्ययन कहता है कि वो गाय के दूध से कहीं ज्यादा स्वास्थ्यप्रद होते हैं.

क्या हम इसे खरीद सकते हैं

दक्षिण अफ्रीका की एक कंपनी गुर्मे ग्रब ने ऐसे ही कीड़ों-मकोड़ों के दूध से बनाना शुरू किया, जिसमें कई तरह के कीड़े होते हैं. ये स्वाद में आ रहा है-पीनट बटर, चाकलेट और चाय. उनका कहना है कि इस दूध में प्रोटीन बहुत है और साथ ही अच्छा फैट भी. ये लैक्टोस फ्री है. साथ ही स्वादिष्ट होने के साथ गाय के दूध से कहीं ज्यादा बेहतर है.

प्रोटीन और पोषक तत्वों से भरपूर

गुर्मे ग्रब नाम की यह कंपनी इसे अगला सुपरफूड बता रही है. वेबसाइट पर लिखा गया है, एंटोमिल्क की कल्पना टिकाऊ, प्रकृति के अनुकूल, पौष्टिक, लैक्टोज मुक्त, स्वादिष्ट और भविष्य के डेयरी विकल्प के रूप में की जा सकती है. कंपनी के अनुसार एंटोमिल्क का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें बहुत ज्यादा प्रोटीन है और आयरन, जिंक और कैल्शियम जैसे खनिज भी हैं. इस दूध से कंपनी एक खास किस्म की आइसक्रीम बनाती है, जो तीन फ्लेवर में उपलब्ध है- चॉकलेट, पीनट बटर और चाय. इसे कंपनी ने एंटोमिल्क कहा है. एंटोमिल्क तथाकथित कॉकरोच मिल्क की शुरुआत के दो साल बाद बाजार में आया है. कॉकरोच मिल्क डिप्लोपटेरा पुक्टाटा से बना हुआ है. हवाई द्वीप में मिलने वाला ये विशेष प्रकार का तिलचट्टा अंडे देने के बजाय बच्चों को जन्म देती है. इनका दूध प्रोटीन, वसा और शुगर का क्रिस्टल होता है, जो तिलचट्टे के बच्चों की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है.

इसे कहा जा रहा है एंटोमिल्क

एंटोमिल्क का नाम एंटोमोफेगी शब्द से आता है. इसका मतलब है कीड़ों को खाने की प्रथा. दुनियाभर में हो रहे फूड फेस्टिवल में भी कीड़ों से बने तरह तरह के व्यंजन पेश किए जाते हैं, ताकि लोगों में इनके प्रति रुचि बढ़ाई जा सके. बावजूद इसके अब तक कीड़ों वाला खाना दुकानों में बिकना शुरू नहीं हुआ है. एंटोमिल्क के जरिए फिर इस ओर ध्यान खींचा जा रहा है कि जानवरों के इस्तेमाल से पर्यावरण पर कितना बुरा असर पड़ता है.

गाय का दूध पर्यावरण के लिए ठीक नहीं

गाय चारा खाने के दौरान मीथेन को हवा में छोड़ती है, जो एक जहरीली गैस है. लंबे समय से पर्यावरणविद् आरोप लगाते आए हैं कि बीफ और दूध के लिए गाय के इस्तेमाल से पर्यावरण में मीथेन की मात्रा बढ़ रही है. ऐसे में एंटोमिल्क को एक ऐसे विकल्प के तौर पर पेश किया जा रहा है, जिससे ना ही मीथेन हवा में घुलेगा और ना ही पानी की अत्यधिक खपत होगी. वैसे भी माना जा रहा है कि कॉकरोच का तरल फॉर्म में सेवन कई क्रॉनिक बीमारियों से राहत देता है. इसी वजह से चीन में बड़े पैमाने पर पैदा किया जा रहा है. अपने औषधीय गुणों के कारण कॉकरोच फार्मिंग इस देश में एक फायदेमंद बिजनेस की तरह उभरा है.